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कमलनाथ द्वारा ओबीसी वर्ग को दिया 27 फीसदी आरक्षण भाजपा ने छीना: कांग्रेस

कमलनाथ द्वारा ओबीसी वर्ग को दिया 27 फीसदी आरक्षण भाजपा ने छीना: कांग्रेस
राजनीति
13-Oct-26
मप्र में कमलनाथ और कांग्रेस सरकार ने ही ली ओबीसी की सुध

भाजपा सरकार के षड्यंत्र के चलते ओबीसी वर्ग के हाथों से चला गया 27 प्रतिशत आरक्षण

छिन्दवाड़ा अपडेट

मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वमान्य जनप्रतिनिधि कमलनाथ के अथक व सतत प्रयत्नों से ओबीसी वर्ग को उनकी मंशानुसार शासकीय भर्तियों में आरक्षण का लाभ प्राप्त होता। मप्र के इतिहास में पहली दफा कमलनाथ सरकार के द्वारा ही ओबीसी वर्ग को शासकीय भर्तियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का निर्णय लिया था। जिसके उपरांत ओबीसी विरोधी भाजपा सरकार ने विभिन्न माध्यमों से षड्यंत्र रचकर आरक्षण से वंचित रखने की लगातार और भरपूर कोशिशें की, परिणाम स्वरूप अन्य पिछड़ा वर्ग के हाथों से 27 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार छिन गया। उक्त उदगार कांग्रेस अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष बैजू वर्मा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से व्यक्त किए। 

श्री बैजू वर्मा ने जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में कमलनाथ जी ने मार्च 2019 में प्रदेश के ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला किया था। दिनांक 19 मार्च 2019 को उच्च न्यायालय ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल विषयों के लिए आरक्षण पर स्थगन दिया, किन्तु यह स्थगन केवल कुछ नौकरियों के लिए था। ओबीसी के रिजर्वेशन की सभी बाधाओं को दूर करने के लिए जुलाई 2019 में कमलनाथ सरकार ने विधानसभा से 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का कानून भी पास किया। किन्तु भाजपा ने षड्यंत्र कर कांग्रेस की सरकार गिरा दी और फिर तात्कालीन सीएम कमलनाथ द्वारा ओबीसी वर्ग के हित में लिए गए आरक्षण सम्बंधित फैसलें में षड्यंत्रकारी रूख अपनाते हुए उसमें अनेकों-अनेक पेचीदियां लगाई। ओबीसी वर्ग आरक्षण से वंचित रहे इसके लिए भाजपा ने हमेशा षड्यंत्रकारी रवैया अपनाया है। विगत 07 वर्षों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो यह बात स्पष्ट हो जाती है।

पूर्व सीएम कमलनाथ जी के द्वारा मध्यप्रदेश में ओबीसी वर्ग के प्रति लिया गया सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण फैसला था। इसके पश्चात मार्च 2020 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनीं जिसने ओबीसी के खिलाफ षड्यंत्र शुरू किया। उच्च न्यायालय का आदेश सिर्फ कुछ पदों पर लागू होना था, किन्तु भाजपा सरकार ने पूरे प्रदेश में सभी जगह यह आदेश लागू कर ओबीसी वर्ग को दिए गए 27 फीसदी आरक्षण की हत्या कर दी। भाजपा सरकार ने 18 अगस्त 2020 को अतिरिक्त महाधिवक्ता ने उच्च न्यायालय में यह मत दिया कि 14 प्रतिशत आरक्षण के साथ ही सभी सरकारी विभागों में भर्तियां की जाएं। भाजपा सरकार का यह ओबीसी वर्ग के साथ खुला षड्यंत्र था।

भाजपा की ओबीसी विरोधी सोच यहां नहीं थमी इन्होंने जनवरी 2021 में उच्च न्यायालय में एक आवेदन प्रस्तुत किया कि 14 प्रतिशत आरक्षण के साथ ही भर्तियां कर ली जाएं और 13 प्रतिशत आरक्षण को होल्ड पर रखा जाए। सरकार के इस अभिमत के बाद जुलाई 2021 को जबलपुर उच्च न्यायालय ने 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के साथ भर्ती करने का व 13 प्रतिशत को होल्ड करने का आदेश दिया। माननीय उच्च न्यायालय ने 28 जनवरी 2025 के अपने आदेश में 27 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया और याचिका खारिज होने के साथ ही प्रदेश में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करवाने के दरवाजे पूरी तरह से खुल गए।

भाजपा सरकार ने हमेशा किया विरोध

जबलपुर उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य शासन द्वारा प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण देने के फैसले का विरोध किया था। यह कांग्रेस पार्टी की नीतियों की जीत थीं। मार्च 2019 में श्री कमलनाथ ने अपने मुख्यमंत्रीत्व कार्यकाल में मध्य प्रदेश के ओबीसी समुदाय को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया था। हाईकोर्ट के फैसले ने श्री कमलनाथ की तत्कालीन सरकार के निर्णय को एक बार फिर सही साबित किया, जबकि भाजपा सरकार ने हमेशा ही ओबीसी वर्ग को आरक्षण से वंचित रखने के लिए भरपूर प्रयास किए हैं। इस बार भाजपा अपने मंसूबों में कामयाब रही, उसने माननीय न्यायालय के समक्ष सम्पूर्ण तथ्यों को प्रस्तुत नहीं किया और तर्क भी नहीं दिए इसके पीछे की वजह थी, ओबीसी विरोधी मानसिकता जिसका परिणाम यह हुआ कि ओबीसी वर्ग के हाथों से भाजपा ने अपनी षड्यंत्रकारी रणनीति के तहत 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ छीन लिया। श्री वर्मा ने जारी बयान के अंत में कहा कि ओबीसी वर्ग भाजपा के तंत्र और षड्यंत्र को अच्छी तरह समझ चुकी है, जवाब सही समय आने पर दिया जाएगा।
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