अतिकाय, कुंभकरण एवं मेघनाद का हुआ वध
धर्म
19-Oct-26
दशहरा पर आज होगा रावण पुतले का दहन

छिंदवाड़ा अपडेट
श्रीरामलीला रंगमंच छोटी बाजार में लीला के तेहरवें दिन कुम्भकर्ण वध एवं मेघनाद वध की लीला खेली गई। मण्डल के अध्यक्ष अरविंद राजपूत ने बताया कि रावण अपने राज दरबार मे विराजित रहता है। तभी उसे लक्ष्मण जी के चैतन्य होने की जानकारी प्राप्त होती है। इसके बाद वह अपने वीर एवं शक्तिशाली पुत्र अतिकाय को युद्ध में भेजता है, लक्ष्मण एवं अतिकाय के बीच भयंकर युद्ध होता है जिसमें अतिकाय का वध लक्ष्मण के द्वारा किया जाता है।
अतिकाय के वध के बाद रावण विचार करके अपने अनुज कुम्भकर्ण को जाग्रत करता है। कुम्भकर्ण अपने महल में छः मास की नींद में सोया रहता है। कुम्भकर्ण के जागने के पश्चात रावण उसे पूरी स्थिति से अवगत कराता है। कुम्भकर्ण रावण को नीति उपदेश देकर जानकी को वापस श्रीराम को सौपने कहता है परंतु रावण उसकी एक नही सुनता और युद्ध के लिए भेज देता है। इधर राम दल के शिविर में सूचना प्राप्त होती है कि कुम्भकर्ण युद्ध मैदान में राम दल को भयंकर क्षति पहुँचा रहा है। तब भगवान श्रीराम युद्ध के लिए आते है, कुम्भकर्ण और श्रीराम में भीषण युद्ध होता है। श्रीराम द्वारा कुम्भकर्ण का वध किया जाता है।
मुख्य निर्देशक श्रान्त चंदेल ने बताया कि रावण द्वारा मेघनाद को बुलाया गया एवं युद्ध हेतु आदेशित किया गया। युद्ध मे जाने से पूर्व मेघनाद अपनी विजय को सुनिश्चित करने के लिए यज्ञ करता है परंतु उस यज्ञ को लक्ष्मण जी के नेतृत्व में वानर सेना नष्ट कर देती है। इस तरह पुनः लक्ष्मण एवं मेघनाद के बीच भीषण युद्ध प्रारंभ हो जाता है। मेघनाद युद्ध मे अद्वितीय पराक्रम दिखाता है परन्तु अपनी दृढ़ इच्छा, व्रत एवं वीरता के बल पर लक्ष्मण जी मेघनाद का वध कर देते है। इसके बाद बहुत ही मार्मिक सती सुलोचना प्रसंग की लीला का मंचन हुआ जिसमे दिखाया गया कि मेघनाद पत्नी सुलोचना श्री राम के दल ने जाकर अपने पति का शीश मांगती है। इस प्रसंग ने सभी की आंखों में अश्रु भर दिए। श्रीराम सम्मान के साथ मेघनाद के शव को लंका को सौंप देते है। मंचन के तेहरवे दिन श्री राम की भूमिका रजत पांडे, लक्ष्मण आयुष शुक्ला, हनुमान संतोष कुशवाह, रावण जितेंद्र सोनी, अतिकाय की भूमिका में तेजस्व चौरसिया, कुंभकर्ण अभिषेक मुदलियार, मेघनाद उत्तम सोनी, विभीषण नीरज चौरसिया एवं सुग्रीव की भूमिका में अजय चौकसे दिखाई दिए।
राष्ट्रीय संत पूज्य गुरुदेव श्रद्धेय विवेक जी महाराज होंगे दशहरा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
राष्ट्रीय संत पूज्य गुरुदेव श्रद्धेय विवेक जी महाराज दशहरे के विशेष आयोजन के मुख्य अतिथि होंगे। महाराज श्री का जीवन ज्ञान, साधना, धर्म और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम है। इनकी उच्च शिक्षा यूरोप में संपन्न हुई। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात इन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास का मार्ग अपनाया और अपना जीवन धर्म, अध्यात्म एवं सनातन संस्कृति की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। एक प्रतिष्ठित धार्मिक लेखक, शास्त्रों के गहन अध्येता एवं धर्मज्ञ हैं।
महाराज श्री ने दो बार माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा कर अपनी अगाध श्रद्धा, तपस्या और आध्यात्मिक संकल्प का परिचय दिया है एवं माँ नर्मदा के पावन तट पर स्थित प्राचीन तीर्थों, धार्मिक स्थलों एवं आध्यात्मिक महत्व के स्थानों को समाज के समक्ष उजागर करने में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारतवर्ष में स्थित विभिन्न तीर्थस्थलों की महिमा, इतिहास और धार्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। इनके साथ ही कार्यक्रम की अध्यक्षता छिंदवाड़ा पांढुर्ना क्षेत्र के सांसद विवेक बंटी साहू करेंगे, विशिष्ट अतिथि के रूप में महापौर विक्रम अहके, नगर निगम अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनू मागो, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना, विशेष अतिथि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष विश्वनाथ ओक्टे, पूनमचंद साहू, डॉ मनन गोगिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।