एड-ऑन थेरेपी के उपचार से सिकल सेल एनीमिया बालिका हुई स्वस्थ्य
स्वास्थ्य
09-Oct-26
10 महीने से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ी

छिन्दवाडा अपडेट
परासिया विकासखंड के ग्राम शिवपुरी निवासी 8 वर्षीय परी (बदला हुआ नाम) सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित है। वर्ष 2021 में बीमारी की पहचान होने के बाद से ही परिवार को उसके स्वास्थ्य को लेकर कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कम वजन, आंखों में पीलापन, थकान और पैरों में तेज दर्द के कारण परी की दिनचर्या प्रभावित हो रही थी। थोड़ी दूर चलने पर ही उसके पैरों में दर्द होने लगता था। रात में भी दर्द के कारण उसे काफी परेशानी होती थी।
आयुर्वेदिक चिकित्सा से स्वास्थ्य में हुआ सुधार
परी के उपचार में आयुष विंग छिंदवाड़ा के आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. नितिन टेकरे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिला आयुष अधिकारी श्रीमती प्रमिला यावतकर के निर्देशन तथा सिकल सेल के नोडल अधिकारी डॉ. नीरज विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में परी को पहले से चल रही एलोपैथिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेदिक दवाइयां एड-ऑन थेरेपी के रूप में दी जाने लगीं। इस दौरान उसकी एलोपैथिक दवाइयां बंद नहीं की गईं। परिवार से प्राप्त फीडबैक के अनुसार, नियमित उपचार के बाद परी के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। पिछले वर्ष नवंबर के बाद से उसे लगभग 10 महीने तक बाहर से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उसका वजन, जो पहले लगभग 14 से 18 किलो के बीच रहता था, अब बढ़कर 24 किलो हो गया है। आंखों का पीलापन पूरी तरह समाप्त हो गया है तथा थकान और पैरों के दर्द में भी काफी कमी आई है। अब उसे भूख भी अच्छी लगने लगी है।
उपचार से परिवार को मिली राहत
परी के पिता के अनुसार, उपचार के बाद बच्ची के स्वास्थ्य में आए बदलाव से परिवार संतुष्ट है। वर्तमान में परी एलोपैथिक दवाइयों के साथ आयुष विंग से प्राप्त आयुर्वेदिक दवाइयों का नियमित सेवन कर रही है। आयुष विभाग की चिकित्सकीय टीम के मार्गदर्शन में जारी उपचार से परी के स्वास्थ्य में आए ये बदलाव परिवार के लिए राहत लेकर आए हैं। यह प्रकरण एलोपैथिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेदिक उपचार को पूरक रूप में अपनाने के अनुभव को सामने लाता है। सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी में नियमित चिकित्सकीय देखरेख और निर्धारित उपचार जारी रखना महत्वपूर्ण है।